ITR 2025 फाइलिंग डेडलाइन: ऑडिट वाले करदाताओं को क्या जानना जरूरी
क्या आप 2025 में अपना कर रिटर्न फाइल करने की टाइम‑लाइन को लेकर उलझन में हैं? ITR 2025 की डेडलाइन अब स्पष्ट हो गई है, लेकिन ऑडिट की ज़रूरत वाले करदाताओं के लिए अलग‑अलग तिथियां लागू होती हैं। इस लेख में हम प्रमुख डेडलाइन, टैक्स ऑडिट की आवश्यकताएं, संभावित दंड और देर से फाइलिंग के विकल्पों को विस्तार से समझेंगे।
डेडलाइन का विवरण और ऑडिट‑आधारित वर्गीकरण
सेंटरल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने वित्तीय वर्ष 2024‑25 (आकलन वर्ष 2025‑26) के लिये दो समूहों के लिये अलग‑अलग फाइलिंग तिथियां घोषित की हैं।
- नॉन‑ऑडिट केस: व्यक्तिगत करदाता, हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF), एसोसिएशन ऑफ़ पर्सन्स (AOP) और बॉडी ऑफ़ इंडिविडुअल्स (BOI) जिनके खातों की ऑडिट ज़रूरी नहीं है, उन्हें अपना ITR 16 सितंबर 2025 तक जमा करना होगा। यह तारीख तकनीकी गड़बड़ियों के चलते पोर्टल पर विस्तार के बाद निर्धारित की गई थी।
- ऑडिट केस: वे व्यवसाय और पेशेवर जो सेक्शन 44AB के तहत ऑडिट के अधीन हैं, उन्हें ITR जमा करने के लिये 31 अक्टूबर 2025 की अवधि मिली है। यह मूल असली डेडलाइन से काफी बढ़ा हुआ विस्तार है, जिससे जटिल ऑडिट प्रक्रिया वाले करदाताओं को राहत मिली है।
साथ ही, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (फ़ॉर्म 3CA/3CB/3CD) की सबमिशन डेडलाइन भी 31 अक्टूबर 2025 तक बढ़ा दी गई है। यह बदलाव राजस्थान एवं कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेशों और टैक्स प्रोफेशनल्स की अपीलों को ध्यान में रख कर किया गया।
सेक्शन 44AB के तहत ऑडिट किनको करना पड़ता है?
आयकर अधिनियम की सेक्शन 44AB यह तय करती है कि किन कारोबारों और पेशेवरों को टैक्स ऑडिट करवाना अनिवार्य है। मुख्य मानदंड नीचे सूचीबद्ध हैं:
- व्यवसाय जिनकी वार्षिक टैर्नओवर 1 करोड़ रुपये से अधिक है। यदि नकद लेन‑देन कुल टर्नओवर का 5% या उससे कम है, तो यह सीमा 10 करोड़ रूपए तक बढ़ जाती है।
- पेशेवर (जैसे डॉक्टर, एंकर, वकील आदि) जिनकी ग्रॉस रिसीट्स 50 लाख रुपये से अधिक है।
- प्रेसूम्प्टिव टैक्स स्कीम (सेक्शन 44AD/44ADA/44AE) के तहत कार्य करने वाले करदाता जो घोषित लाभ दर से कम लाभ दिखाते हैं और उनका आय बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से ऊपर है।
इनमें से किसी एक शर्त को पूरा करने पर, करदाता को चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा ऑडिट करवाना आवश्यक है और फ़ॉर्म 3CA/3CB/3CD के माध्यम से रिपोर्ट जमा करनी होगी। रिपोर्ट में यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) का होना अनिवार्य है, अन्यथा रिटर्न सिस्टम द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
देर से फाइलिंग पर आर्थिक दण्ड और विकल्प
डेडलाइन को मिस करने पर करदाता को कई प्रकार के दण्डों का सामना करना पड़ता है। मुख्य दण्ड नीचे दिए गए हैं:
- इंटरेस्ट चार्ज: सेक्शन 234A के तहत बकाया टैक्स पर हर महीने 1% (या उसका भाग) ब्याज लगना अनिवार्य है।
- लेट फाइलिंग फीस: सेक्शन 234F के अनुसार देरी की अवधि और करदाता की श्रेणी के आधार पर फीस तय होती है। यह राशि 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक हो सकती है।
- ऑडिट दण्ड: सेक्शन 271B के तहत यदि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट समय पर नहीं दी गई, तो टर्नओवर या ग्रॉस रिसीट्स के 0.5% के बराबर दण्ड लगाया जाता है, परंतु इसकी अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये है। उचित कारण न प्रस्तुत करने पर यह दण्ड लागू हो जाता है।
हालाँकि, करदाता के पास देर से भी रिटर्न दाखिल करने के विकल्प हैं:
- बिलेटेड रिटर्न: 31 दिसंबर 2025 तक फाइल किया जा सकता है, परंतु लेट फीस और ब्याज अभी भी लागू रहेगा।
- रीवाइज़्ड रिटर्न: मूल रिटर्न में सुधार करने के लिये भी यही अंतिम तारीख है।
- अपडेटेड रिटर्न: 31 मार्च 2030 तक (आकलन वर्ष के चार साल बाद) जमा कर सकते हैं, जिससे भविष्य में कोई भी त्रुटि ठीक की जा सकती है।
व्यावहारिक सुझाव और समय पर तैयारी के लिए रणनीति
ऑडिट वाले करदाताओं को यह सलाह दी जाती है कि वे रिटर्न फाइलिंग को अंतिम क्षण तक न टालें। शुरुआती तैयारी से तकनीकी समस्याओं से बचाव होता है और आवश्यक दस्तावेज़ों को समय पर व्यवस्थित किया जा सकता है। कुछ काम करने लायक कदम इस प्रकार हैं:
- योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट से पहले से संपर्क कर ऑडिट का शेड्यूल तय करें।
- आवश्यक फॉर्म (3CA/3CB/3CD) और UDIN की वैधता को चेक करें।
- इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉग‑इन कर सभी आवश्यक दस्तावेज़ (बैंक स्टेटमेंट, इनवॉइस, लेजर) को डिजिटल रूप में अपलोड करें।
- रिटर्न फाइलिंग के बाद लेट फीस और इंटरेस्ट की गणना करके संभावित दण्ड से बचने के लिये भुगतान करें।
- डेडलाइन से कुछ हफ्ते पहले आयकर पोर्टल पर टेस्ट एंट्री करके देखें कि कोई तकनीकी बाधा तो नहीं आ रही।
यदि कोई रुकावट आती है, तो तुरंत आयकर हेल्पडेस्क या अपने CA को सूचित करें ताकि समय रहते समाधान निकाला जा सके। याद रखें, देर से फाइलिंग सिर्फ आर्थिक बोझ नहीं बनाती, बल्कि भविष्य में ऑडिट या जांच की संभावनाओं को भी बढ़ा देती है।
इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए, चाहे आप व्यक्तिगत करदाता हों या बड़े व्यापारियों में से एक, समय पर फाइलिंग और ऑडिट रिपोर्ट की तैयारी से आप बिना किसी परेशानी के अपना टैक्स भर सकते हैं और अतिरिक्त दण्ड से बच सकते हैं।
20 जवाब
ऑडिट केस वाले टैक्सपेयर को 31 अक्टूबर तक फॉर्म 3CA/3CB जमा करना अनिवार्य है।
ऑडिट की तैयारी में पहले अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से शेड्यूल फिक्स कर लो, ताकि टैक्स रिपोर्ट समय पर तैयार हो सके।
डेडलाइन से पहले सभी लेजर और बैंक स्टेटमेंट अपलोड कर देना चाहिए।
लेट फ़ाइलिंग फीस 234F के तहत लागू होगी, इसलिए देर न करना फायदेमंद है।
यदि कोई तकनीकी समस्या आती है तो तुरंत आयकर हेल्पडेस्क या अपने सीए को कॉल करो 😊
ध्यान रहे कि फॉर्म 3CA में UDIN का वैध होना ही सिस्टम को रिटर्न ऐकसप्ट करने का कंडीशन है।
रिटर्न फाइलिंग में टेस्ट एंट्री करने से तकनीकी गड़बड़ी पकड़ी जा सकती है और समय बचता है।
नॉन‑ऑडिट केस वाले लोगों को 16 सितंबर तक फाइल करना बेहतर रहेगा, ताकि बाद में कोई दण्ड न लगे।
बिलेटेड रिटर्न का विकल्प 31 दिसंबर तक है, लेकिन इंटरेस्ट और लेट फीस अभी भी बरकरार रहती है 😅
यदि आप सेक्शन 44AB के तहत हैं तो टर्नओवर सीमा और नकदी लेन‑देनों का ध्यान रखो, इससे ऑडिट ट्रिगर नहीं होगा।
ऑडिट रिपोर्ट देर से जमा करने पर सेक्शन 271B के तहत 0.5% दण्ड लग सकता है, इसलिए समय पर भेजना ज़रूरी है 😐
कई बार पोर्टल पर अपडेटेड सॉफ़्टवेयर बग्स से फ़ाइल रेजेक्ट हो जाती है, इसलिए बैकअप रखना महत्वपूर्ण है।
टैक्स रिटर्न में गलत जानकारी देने से भविष्य में जांच हो सकती है।
अपडेटेड रिटर्न 31 मार्च 2030 तक दायर किया जा सकता है, पर दण्ड फिर भी लागू रहेगा।
ऑडिट केस वाले करदाताओं को सबसे पहले अपनी टर्नओवर और ग्रॉस रिसीट्स की गणना सही तरीके से करनी चाहिए, क्योंकि ये आंकड़े सेक्शन 44AB की सीमा निर्धारित करते हैं। फिर उन्हें योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपर्क करना चाहिए और ऑडिट शेड्यूल फिक्स करना चाहिए। अगला कदम फॉर्म 3CA या 3CB तैयार करना है, जिसमें सभी लेन‑देनों की प्रूफ्स संलग्न करनी होंगी। इस प्रक्रिया में UDIN वैधता की जाँच अनिवार्य है, क्योंकि बिना UDिन के रिटर्न सिस्टम द्वारा रिजेक्ट हो सकता है। तैयार दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप में आयकर पोर्टल पर अपलोड करें और सुनिश्चित करें कि फाइल आकार सीमाओं के भीतर है। पोर्टल पर लॉग‑इन करके टेस्ट एंट्री करने से संभावित तकनीकी समस्याओं का पता चल सकता है। यदि कोई त्रुटि आती है तो तुरंत तकनीकी सपोर्ट से संपर्क करें, नहीं तो देर से सबमिशन पर ब्याज और लेट फीस लगेगी। सेक्शन 234A के तहत देर से भुगतान पर हर माह 1% ब्याज लग सकता है, इसलिए टैक्स दायित्व को समय पर पूरा करना आर्थिक रूप से फायदेमंद है। सेक्शन 234F की फीस वर्गीकरण के अनुसार 1,000 से 10,000 रुपये तक हो सकती है, इसलिए दंड से बचने के लिए समय सीमा का पालन आवश्यक है। यदि ऑडिट रिपोर्ट समय पर नहीं दी गई तो सेक्शन 271B के तहत टर्नओवर या ग्रॉस रिसीट्स के 0.5% दण्ड लगाया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये है। देर से फाइलिंग के विकल्पों में बिलेटेड, रिवाइज़्ड और अपडेटेड रिटर्न शामिल हैं, प्रत्येक का अपना समय‑सीमा है। बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर तक दायर किया जा सकता है, पर इसमें भी लेट फीस और ब्याज लागू रहेगा। रिवाइज़्ड रिटर्न का उपयोग करके पिछले रिटर्न में की गई त्रुटियों को सुधारा जा सकता है, लेकिन इसे भी निर्दिष्ट तिथि के भीतर जमा करना होगा। अपडेटेड रिटर्न की अंतिम तिथि 31 मार्च 2030 है, जिससे चार साल बाद भी सुधार संभव है। इन सभी विकल्पों को समझकर अपने वित्तीय वर्ष की योजना बनाना चाहिए, जिससे अनावश्यक दण्ड और तनाव से बचा जा सके। अंत में, समय पर फाइलिंग न केवल आर्थिक बोझ घटाता है, बल्कि भविष्य में किसी भी ऑडिट या जांच की संभावना को भी कम करता है।
कोई भी टेंडरिंग बिना तैयारी के नहीं करना चाहिए
आयकर डेडलाइन के करीब आते ही सभी करदाता बेचैन हो जाते हैं 😰 लेकिन यदि आप अपने दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें तो यह तनाव कम हो सकता है 🌿
ऑडिट के लिए आवश्यक दस्तावेज़ीकरण में त्रुटि न होने पर दण्ड से बचा जा सकता है।
सभी को शुभकामनाएँ, जल्द ही सब फाइल हो जाएँगी 🚀
फाइलिंग डेडलाइन याद रखो, देर मत करो :)