दिल्ली में स्थित All India Institute of Medical Sciences, New Delhi (AIIMS) में नई अकादमिक सत्र की शुरूआत के मद्देनजर तैयारियों का चक्र तेज़ पड़ गया है। पिछले कुछ दिनों से छात्र परिवारों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा है कि क्या समय पर हॉस्टल और क्लासरूम सुविधाओं का पूरा होना संभव होगा। हालांकि हालिया रिपोर्टों में इस संबंध में जिला उपायुक्त के स्पष्ट बयान की पुष्टि अभी नहीं मिल सकी, लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण और संसाधन वितरण की मांग छात्र संगठनों द्वारा लगातार उठाई जा रही है। विशेषकर जब नए बैच का प्रवेश निकट हो, तो बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अफसोस की बात यही है कि कई बार ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो बड़े संस्थानों में भी इंफ्रास्ट्रक्चर तनाव बना रहता है। यहाँ की स्थिति भी कमतर नहीं है। वर्तमान परिदृश्य में सबसे प्रमुख चर्चा NEET 2026Delhi और पोस्टग्रेजुएशन के INI-CET January 2026National Entrance Tests पर केंद्रित है। इन परीक्षाओं की तिथियां अब आधिकारिक रूप से घोषित होने की प्रक्रिया में हैं, जिसके बाद ही प्रवेश प्रक्रिया का औपचारिक ढंग से चरण शुरू होता है।
बड़ी बात यह है कि भर्तियों का समय निर्धारित होने के बावजूद, फिजीकल तैयारी में जो गति होनी चाहिए उसमें कहीं न कहीं विलंब दिखा देता है। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रवेश परीक्षाओं के लिए आवेदन भरने की तिथियां आमतौर पर सत्र शुरू होने से करीब छह महीने पहले सामने आती हैं। इस बार विशेष ध्यान National Board of Medical Examinations (NBME) ने अपने शेड्यूलिंग पर दिया है।
विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए, सभ्यता और सुविधाओं का मुद्दा हमेशा प्राथमिकता में रहता है। जब 2026 के सत्र की तैयारी हो रही हो, तो पुराने सालों की समस्याएं—जैसे हॉस्टल में बेड की कमी या क्लासरूम में बैठने की गिनती—को हल करना जरूरी है।
व्यावहारिक सन्देश यह है कि केवल परीक्षा पास करना ही काफी नहीं है। एक बार छात्र प्रवेश लेते हैं, तो उनकी दिनचर्या मुख्य रूप से हॉस्टल और क्लासरूम में बिताई जाती है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त तत्त्व के तहत चलने वाले ऐसे संस्थानों में, जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
यहाँ एक दिलचस्प तथ्य यह है कि कभी-कभी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाता है। भले ही हालिया बयानों की उपलब्धि सीमित हो, लेकिन यह प्रक्रिया एक निश्चित क्रम में चलती है। छात्रों की सुरक्षा और रहन-सहन का मानक रखना किसी भी मेडिकल कॉलेज का पहला कार्यों में से एक है।
'अक्सर छात्रों के माता-पिता को लगता है कि भर्ती होते ही सब ठीक हो जाएगा,' एक स्थानीय विश्लेषक ने टिप्पणी की। 'लेकिन वास्तविकता में, हॉस्टल के बेड और कक्षाओं की साख़ी तैयारी तब ही पूर्ण होती है जब सभी अधिकारी मौसम के अनुसार तैयार हो जाएं।' यह दर्शाता है कि आम जनता की चिंता वैध क्यों है।
जैसे ही नवंबर और दिसंबर के महीने आएंगे, तैयारियां और गति पाएँगी। अगर आप भविष्य के छात्र या परिवार के सदस्य हैं, तो अपनी तैयारी दो हिस्सों में करें: एक परीक्षा की, दूसरे रोज़मर्रा के जीवन की सुविधाओं की।
इंडियन मेडिकल काउंसिल (IMC) और संबंधित निकायों द्वारा समय-समय पर जारी किए गए मंच के नियम बताते हैं कि यदि हॉस्टल सुविधाएं न्यूनतम मानकों से कम हैं, तो छात्र अन्य विकल्प खोज सकते हैं। हालांकि, इसके लिए लिखित अनुमति की आवश्यकता होती है। इसलिए, यह जानना जरूरी है कि संस्थान की ओर से कौन सी जिम्मेदारी ली जा रही है।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जब भी नया सत्र शुरू होता है, तो पुराने छात्र अपने अनुभव साझा करते हैं। उनके अनुसार, शुरुआती कुछ हफ्ते में हॉस्टल में भीड़भाड़ अधिक देखी जाती है। इसलिए, प्रशासन को समय पर योजना बनानी होगी। यदि जिला उपायुक्त या संबंधित अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं, तो इसकी सूचना आम जनता को भी दी जानी चाहिए।
आधिकारिक तौर पर एनआईटीई (NTA) द्वारा मार्च 2026 में आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, INI-CET के लिए आवेदन जनवरी 2026 के पहले सत्र में खुल सकते हैं, इसलिए छात्रों को वेबसाइट पर नज़र रखनी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन और संस्थान के कुलपति मिलाकर वर्ष के शुरू में सर्वेक्षण करते हैं। जिला उपायुक्त आमतौर पर सत्र शुरू होने से एक महीने पहले निरीक्षण करने के लिए जाने की योजना बनाते हैं।
कट ऑफ मार्क पिछले साल के आधार पर निर्धारित होते हैं। एम्स दिल्ली जैसे संस्थानों के लिए सामान्य श्रेणी में कट ऑफ 600-620 के आसपास रहता है, लेकिन यह प्रतिस्पर्धी स्तर पर बदल सकता है।
नए छात्रों को प्रवेश के पहले दिन ID कार्ड, यूनिफॉर्म और हॉस्टल आवंटन मिलता है। बीड़ा के बिस्तर और अन्य सामान के लिए अलग से अनुमोदन की आवश्यकता हो सकती है जो सत्र की शुरुआत में प्रदान किया जाता है।