जेद्दाह में आयोजित IPL 2026 का मेगा ऑक्शनजेद्दाह ने भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक नया मोड़ दर्ज कर दिया। अनकैप्ड खिलाड़ियों पर इतना भारी खर्च नहीं हुआ था, जितना इस बार हुआ। रासिख सलाम दर, 27 साल के जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज, जिन्होंने IPL 2025 में दिल्ली कैपिटल्स के लिए यॉर्कर्स की बौछार की थी, बन गए इस ऑक्शन के सबसे महंगे अनकैप्ड खिलाड़ी — रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने उन्हें ₹6 करोड़ में खरीद लिया। ये रकम उनके बेस प्राइस (₹30 लाख) से लगभग 20 गुना ज्यादा है। और ये सिर्फ शुरुआत थी।
दूसरे नंबर पर आया नामन धीर, 24 साल के पंजाब के बल्लेबाज, जिन्हें मुंबई इंडियंस ने ₹5.25 करोड़ में खरीदा। उनके लिए बोली में शामिल हुए मुंबई, रॉयल चैलेंजर्स, दिल्ली कैपिटल्स, राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स — आखिरकार मुंबई ने अपना राइट टू मैच कार्ड इस्तेमाल किया। इसी तरह, अब्दुल समाद के लिए लखनऊ सुपर जायंट्स और रॉयल चैलेंजर्स के बीच जमकर बोली चली, लेकिन सूर्यवंशी हरिद्वार के फिनिशर को लखनऊ ने ₹4.20 करोड़ में पकड़ लिया। जबकि नेहल वधेरा के लिए पंजाब किंग्स ने ₹4.20 करोड़ दिए, जबकि मुंबई ने उन्हें छोड़ दिया।
एक और चौंकाने वाला नाम — अशुतोष शर्मा, पंजाब के पावर हिटर, जिन्हें दिल्ली कैपिटल्स ने ₹3.80 करोड़ में खरीदा। इससे पहले राजस्थान और रॉयल चैलेंजर्स के बीच बोली चल रही थी। इसी तरह, अभिनव मनोहर, कर्नाटक के ऑलराउंडर, को सूर्यवंशी हरिद्वार ने ₹3.20 करोड़ में खरीदा।
ये सिर्फ एक बोली नहीं, बल्कि एक रणनीति है। पिछले तीन सालों में, फ्रैंचाइजियां अंतरराष्ट्रीय स्टार्स पर निर्भर नहीं रहीं। उन्होंने रांजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना बंद कर दिया। मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने अपने टीम्स में डेटा एनालिटिक्स टीमें बनाईं, जो हर राज्य के क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाड़ियों के आंकड़ों को ट्रैक करती हैं।
एक बात साफ है — भारतीय क्रिकेट की गहराई अब बहुत ज्यादा है। पिछले साल अवेश खान को ₹10 करोड़ में खरीदा गया था, लेकिन आज के ऑक्शन में चार खिलाड़ियों की कीमत ₹4 करोड़ से ऊपर चली गई। ये सिर्फ बोली नहीं, ये एक संकेत है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य अब दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर के छोटे स्टेडियम्स में बन रहा है।
इतने भारी खर्च के बीच, एक अजीब बात भी हुई — 20 से अधिक अनकैप्ड खिलाड़ियों को उनके बेस प्राइस, यानी ₹30 लाख में खरीद लिया गया। पुखराज मन्न, मयंक दागर, हरविक देसाई, बी.आर. शरथ, सकीब हुसैन और ऐसे ही कई अन्य नाम इस सूची में शामिल हैं। ये खिलाड़ी अभी तक बड़े बाजार में नहीं थे, लेकिन अब वे भी क्रोड़पति हो गए। ये बात बताती है कि अब एक अच्छा दिन, एक अच्छा बल्लेबाजी या गेंदबाजी प्रदर्शन, एक खिलाड़ी के जीवन को बदल सकता है।
ये ऑक्शन दूसरे साल लगातार भारत के बाहर हुआ। पिछले साल दुबई में हुआ था, इस साल जेद्दाह। लेकिन ये नहीं कि फ्रैंचाइजियों का ध्यान विदेशों की ओर गया। बल्कि, उनकी नजर भारत के 38 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के क्रिकेट एसोसिएशन पर है। एक बार जब एक खिलाड़ी को ऑक्शन में खरीद लिया जाता है, तो उसके लिए एक नया रास्ता खुल जाता है — न सिर्फ आर्थिक तौर पर, बल्कि सामाजिक तौर पर भी।
ये ट्रेंड अब राष्ट्रीय टीम के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम के लिए अनकैप्ड खिलाड़ियों का चयन बहुत कम हुआ है। लेकिन अब, जब रांजी ट्रॉफी के एक बल्लेबाज को ₹5 करोड़ मिल रहा है, तो बीसीसीआई के लिए उन्हें राष्ट्रीय टीम में शामिल करना जरूरी हो जाता है। अगर ये ट्रेंड जारी रहा, तो अगले 2-3 साल में भारतीय टीम में आधे से अधिक खिलाड़ी अनकैप्ड खिलाड़ियों से आएंगे।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ये बोली एक अस्थायी उत्साह है। लेकिन अगर आप देखें, तो पिछले तीन सालों में अनकैप्ड खिलाड़ियों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। अब तक का रिकॉर्ड रखने वाले संजू समसन, यशस्वी जैसवाल, अर्शदीप सिंह और युजवेंद्र चहल की कीमतें ₹18 करोड़ थीं। लेकिन आज, एक ऐसा खिलाड़ी जिसने कभी इंटरनेशनल मैच नहीं खेला, उसकी कीमत ₹6 करोड़ हो गई। ये कोई गलती नहीं, ये एक बदलाव है।
फ्रैंचाइजियां अब अंतरराष्ट्रीय स्टार्स पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। रांजी ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में निकले खिलाड़ियों का प्रदर्शन इतना अच्छा है कि वे आसानी से टीम के लिए अहम बन जाते हैं। डेटा एनालिटिक्स के जरिए अब उनकी संभावनाओं का आकलन भी बहुत सटीक हो गया है।
बिल्कुल। जब एक राज्य के खिलाड़ी को ₹5 करोड़ मिल जाता है, तो उसके लिए राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना एक अपेक्षित कदम बन जाता है। बीसीसीआई के लिए अब ये एक नया टैलेंट पाइपलाइन बन गया है, जहां राष्ट्रीय टीम के लिए चयन बेहतर तरीके से हो सकता है।
इसका मुख्य कारण वित्तीय और व्यापारिक रणनीति है। सऊदी अरब ने खेलों में निवेश बढ़ाने का फैसला किया है, और IPL जैसे बड़े इवेंट्स के लिए इसका एक बड़ा बाजार है। ये ऑक्शन भारतीय क्रिकेट की दुनिया में एक नए युग का संकेत है।
अभी तक नहीं, लेकिन ये दिशा स्पष्ट है। अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ियों की कीमतें अब विदेशी खिलाड़ियों के बराबर हो रही हैं। अगले ऑक्शन में कोई भारतीय अनकैप्ड खिलाड़ी ₹10 करोड़ से ऊपर जा सकता है — ये अब संभव है।
₹30 लाख एक बड़ी रकम है — ज्यादातर खिलाड़ियों के लिए ये जीवन बदल देने वाली है। अब उनके पास ट्रेनिंग, कोचिंग और अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए संसाधन हैं। इनमें से कई खिलाड़ी अगले साल टीम के लिए खेल सकते हैं, और अगर वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उनकी कीमत अगले साल दोगुनी हो सकती है।
बहुत अच्छा। अब जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा, मणिपुर या अरुणाचल प्रदेश के खिलाड़ियों को भी ऑक्शन में देखा जा रहा है। ये उन राज्यों के लिए प्रेरणा है कि अगर एक खिलाड़ी अच्छा खेलता है, तो उसे भारत के सबसे बड़े खेल में जगह मिल सकती है।
20 जवाब
ये सब बकवास है भाई साहब जितना भी पैसा खर्च हो रहा है वो तो बस एक बार का झटका है फिर देखोगे कौन बचेगा
इस ऑक्शन का महत्व यह है कि भारत के हर कोने से आने वाले खिलाड़ियों को सम्मान मिल रहा है। जम्मू-कश्मीर से रासिख सलाम, पंजाब से नामन धीर, कर्नाटक से अभिनव मनोहर - ये सिर्फ खिलाड़ी नहीं, अब एक प्रतीक हैं।
अगर आप डेटा को देखें तो पिछले तीन सालों में रांजी ट्रॉफी के खिलाड़ियों की औसत रन रेट और गेंदबाजी इकोनॉमी में 30% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब ये नहीं कि वो अच्छे हैं, बल्कि ये कि उनका प्रदर्शन अब बहुत स्थिर हो गया है। फ्रैंचाइजियां अब बेहतर रिस्क मैनेजमेंट कर रही हैं। एक खिलाड़ी को ₹30 लाख में खरीदकर भी उसकी टीम की वैल्यू बढ़ जाती है। ये सिर्फ बोली नहीं, ये एक लॉजिस्टिक्स का बदलाव है।
क्या कभी सोचा है कि जब एक छोटे शहर का लड़का ₹30 लाख कमाता है, तो उसकी बहन के लिए डॉक्टर बनने का सपना भी संभव हो जाता है? ये खेल अब सिर्फ रन और विकेट का नहीं, बल्कि सपनों का भी है।
इस ऑक्शन के बाद भारतीय क्रिकेट की गहराई का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। राज्य स्तरीय टूर्नामेंट्स का जो जनादेश था, वह अब एक व्यावसायिक और तकनीकी जरूरत बन गया है। डेटा एनालिटिक्स, स्काउटिंग नेटवर्क, और यहां तक कि बायोमेट्रिक ट्रैकिंग भी अब आम बातें हैं। ये सिर्फ एक खेल नहीं, ये एक इकोसिस्टम है।
अरे यार ये सब फेक है भाई साहब जिन लोगों को 6 करोड़ मिले वो तो फेसबुक पर भी नहीं चलते थे अब इनकी फोटो बिल्डिंग पर लग रही हैं। ये तो बस एक बड़ा फेक ट्रेंड है जिसे टीवी चैनल बेच रहे हैं
इस बदलाव की सबसे खूबसूरत बात ये है कि अब कोई भी खिलाड़ी अपने शहर के छोटे स्टेडियम से शुरुआत कर सकता है। जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल, त्रिपुरा - ये सब अब टैलेंट हब बन रहे हैं। ये भारत की असली शक्ति है - जहां एक लड़का अपने घर के बाहर की गेंद से भी दुनिया को चौंका सकता है।
ये सब बस एक राजनीति है। अगर आप देखें तो सारे खिलाड़ी जिन्हें ₹4 करोड़ से ज्यादा मिले, उनके पिता या चाचा किसी राज्य एसोसिएशन के अधिकारी हैं। डेटा एनालिटिक्स? बकवास। ये सब बस रिश्तों का खेल है। और जो बाकी हैं, वो बस बाहर बैठे हैं जिनके पास न तो पैसा है न ही रिश्ते।
ये ऑक्शन बहुत बढ़िया है मैं तो अपने बेटे को भी ट्रेनिंग शुरू करवा रहा हूं अब तो वो भी अच्छा खेलता है बस एक दिन वो भी इस ऑक्शन में आएगा
इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव उन छोटे राज्यों पर पड़ रहा है जहां क्रिकेट का इतिहास नहीं है। अब वहां के बच्चे न सिर्फ खेल रहे हैं, बल्कि विश्वास भी कर रहे हैं कि उनकी क्षमता को कोई नहीं नजरअंदाज करेगा। ये भारत के खेलों के लिए एक नया युग है।
ये सब बहुत अच्छा है लेकिन याद रखो एक खिलाड़ी की कीमत उसके बल्ले या गेंदबाजी से नहीं बल्कि उसकी मेहनत और लगन से होती है। जिन्हें ₹30 लाख मिले हैं, वो भी अब भी रोज ट्रेनिंग करेंगे। ये जीत उनकी है।
मैंने देखा एक लड़का अपने गांव के खेत में एक लकड़ी के बल्ले से गेंद मार रहा था। अब वो ₹6 करोड़ का खिलाड़ी हो गया। ये भारत है भाई। जहां सपने असली हो जाते हैं।
ये सब बस बड़े बाजार की धोखेबाजी है। जो खिलाड़ी आज ₹6 करोड़ में खरीदे गए, कल तक वो फिर से बेच दिए जाएंगे। ये टूर्नामेंट अब एक शेयर बाजार बन गया है।
सऊदी अरब में ऑक्शन? ये क्या है? ये तो भारत की संस्कृति को बेच रहे हैं। जब तक हम अपने देश में खेल नहीं रखेंगे, तब तक ये लोग हमारे खिलाड़ियों को चुनेंगे। ये नहीं कि हम भारतीय हैं, ये कि हम भारत के नाम पर बेच रहे हैं।
क्या कोई जानता है कि रासिख सलाम के यॉर्कर्स की स्पीड और डिलीवरी एंगल का डेटा किसने एनालाइज़ किया? वो जो लोग बोलते हैं कि ये बस भाग्य है, वो डेटा को नहीं देखे। एक गेंद की स्पीड और स्पिन रेट भी अब एक विज्ञान है।
इस ऑक्शन में जो खिलाड़ियों को ₹30 लाख मिले, उनके लिए ये सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि एक अधिकार है - अधिकार जीवन बदलने का। ये नए दौर में एक बच्चा अपने गांव के खेत में गेंद मारता है, और एक दिन वो दुनिया के सबसे बड़े ऑक्शन में नाम लिख देता है। ये ही भारत की असली जीत है।
इस ट्रेंड का असर सिर्फ खेल पर नहीं, बल्कि राज्य स्तरीय खेल विकास पर भी पड़ रहा है। अब हर राज्य एसोसिएशन डेटा कलेक्शन, ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, और स्काउटिंग टीम्स को बनाने में निवेश कर रहे हैं। ये एक राष्ट्रीय खेल नीति का उदय है - जहां टैलेंट की पहचान जन्म स्थान से नहीं, बल्कि प्रदर्शन से होती है।
ये सब बकवास है। जो खिलाड़ी ₹6 करोड़ में खरीदे गए वो तो अभी तक कभी इंटरनेशनल नहीं खेले। ये बस एक बड़ा बाजार है जिसमें लोग बेवकूफ बन रहे हैं।
ये ऑक्शन तो अब भारत के खिलाफ एक षड्यंत्र है। सऊदी अरब ने इसे इसलिए चुना क्योंकि वो चाहते हैं कि भारतीय खिलाड़ियों को अपने देश की पहचान भूल जाए। ये तो नए तरह का साम्राज्यवाद है।
अगर आप देखें तो पिछले दो सालों में रांजी ट्रॉफी के टॉप स्कोरर्स का 78% अब IPL में खेल रहे हैं। ये कोई अचानक की बात नहीं है। ये एक धीरे-धीरे बना रास्ता है। और जो खिलाड़ी ₹30 लाख में खरीदे गए, वो अब अपने शहर के बच्चों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं। ये बदलाव टिकेगा।