भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर, पूर्व भारतीय कप्तान ने सप्ताह के आरंभ में एक ऐसी टिप्पणी की जिसने चयनकर्ताओं और प्रशंसकों दोनों का ध्यान खींचा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जून-जुलाई 2026 में होने वाला इंग्लैंड दौरा रोहित शर्मा, भारतीय बल्लेबाज के लिए वह 'परफेक्ट प्लेटफॉर्म' है, जहाँ वे यह सिद्ध कर सकते हैं कि अगले साल होने वाले 50 ओवर के विश्व कप में वे टीम के लिए ओपनिंग की भूमिका निभाएंगे। यह बयान तब सामने आया जब टीम इंडिया अपने इंग्लैंड दौरे पर पहले ही पहुंच चुकी थी।
यह कहानी सिर्फ़ एक सीरीज के बारे में नहीं है; यह एक 39 वर्षीय खिलाड़ी की कैरियर की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई के बारे में है। रोहित शर्मा, जिन्हें 'हिटमैन' के नाम से जाना जाता है, अब केवल एक फॉर्मेट में खेल रहे हैं। इस वनडे सीरीज को उनके लिए 2027 विश्व कप तक अपनी जगह सुरक्षित रखने का पहला बड़ा टेस्ट माना जा रहा है।
टीम इंडिया का यह दौरा दो हिस्सों में बंटा हुआ है। पहले, टीम पाँच टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों की सीरीज में उतरेगी, जो 1 जुलाई 2026, बुधवार से शुरू होगी। इसके बाद, ध्यान तीन मैचों की वनडे सीरीज पर केंद्रित होगा।
भारत बनाम इंग्लैंड वनडे सीरीजइंग्लैंड 14 जुलाई से 19 जुलाई 2026 तक खेली जाएगी। विशेष बात यह है कि इस सीरीज में रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों की वापसी हो रही है। हालांकि, कोहली की उपलब्धता 'subject to availability' (उपलब्धता के आधार पर) बताई गई है, जबकि रोहित की उपस्थिति निश्चित मानी जा रही है।
सोनी स्पोर्ट्स द्वारा आयोजित एक बातचीत में गावस्कर ने रोहित की मानसिक स्थिति पर प्रकाश डाला। उनका मानना है कि रोहित उस प्रकार के खिलाड़ी नहीं हैं जो प्रतिभा और क्षमता के बावजूद दबाव महसूस करते हों।
"मुझे नहीं लगता कि वह ऐसे व्यक्ति हैं जो अपनी प्रतिभा और क्षमता के कारण किसी भी तरह का दबाव महसूस करते हैं। इंग्लैंड (दौरा) उनके लिए यह दिखाने का बहुत अच्छा मंच है कि एक साल और छह महीने बाद भी, वे भारत के लिए बल्लेबाजी का आगाज कर रहे होंगे।" - सुनील गावस्कर
गावस्कर ने जोर देकर कहा कि रोहित को यह पूरी तरह पता है कि वे कहाँ खड़े हैं। उनका कहना है कि अगले डेढ़ साल में, विश्व कप तक पहुँचने के लिए, उन्हें लगातार प्रदर्शन करना होगा। कोई भी भारतीय खिलाड़ी का आकलन कभी खत्म नहीं होता; वरिष्ठ बल्लेबाज जानते हैं कि उन्हें लगातार अच्छा खेलते रहना होता है।
केवल बयानों पर भरोसा करने के बजाय, आंकड़े भी रोहित के पक्ष में हैं। इंग्लैंड की धरती पर रोहित शर्मा का प्रदर्शन हमेशा से चमकदार रहा है। यहाँ कुछ मुख्य तथ्य देखिए:
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि रोहित इंग्लैंड के मैदानों और परिस्थितियों से बेहतर परिचित हैं। फिर भी, 2026 के इन हालिया मैचों में लगातार बड़ी पारियाँ नहीं मिली हैं, जिससे गैलरी और विशेषज्ञों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह विश्व कप के लिए तैयार हैं।
अक्टूबर 2025 में, जब शुभमन गिल को नया वनडे कप्तान घोषित किया गया था, तो गावस्कर ने रोहित की भागीदारी पर संदेह जताया था। उस समय उन्होंने कहा था, "2027 की ओर देखना शुरू हो गया है। कोई निश्चितता नहीं है। यह गारंटी नहीं है कि रोहित शर्मा 2027 विश्व कप के लिए होंगे।"
लेकिन जून 2026 के इस ताज़ा बयान में, उनकी टोन बदल गई है। अब वे इसे एक 'मंच' के रूप में देख रहे हैं जहाँ रोहित अपनी दावेदारी को मजबूत कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर, विशेषकर Instagram और Facebook पर, इस विषय पर काफी चर्चा हो रही है। कई पोस्ट में कहा जा रहा है कि यह सीरीज सिर्फ़ एक द्विपक्षीय मुकाबला नहीं, बल्कि रोहित के लिए 2027 विश्व कप की तैयारी का एक महत्वपूर्ण चरण है।
अगले कुछ हफ्तों में, क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इंग्लैंड के मैदानों पर होंगी। रोहित शर्मा को अपनी औसत बढ़ानी होगी और दिखाવું होगा कि उनकी उम्र (39 वर्ष) उनके अनुभव के मुकाबले कम है। यदि वे इस सीरीज में लगातार 50+ रनों की पारियाँ खेलते हैं, तो चयनकर्ताओं के लिए उन्हें 2027 विश्व कप की टीम में शामिल करना आसान हो जाएगा। वहीं,如果他们 fail होते हैं, तो युवा प्रतिभाओं जैसे यशस्वी जा伊斯वाल या ऋषभ पंत को अवसर मिल सकता है।
सुनील गावस्कर ने कहा कि इंग्लैंड का दौरा रोहित शर्मा के लिए एक उत्कृष्ट मंच है जहाँ वे यह साबित कर सकते हैं कि वे 2027 के वनडे विश्व कप में भारत के लिए ओपनिंग की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि रोहित दबाव महसूस करने वाले खिलाड़ी नहीं हैं और उन्हें लगातार प्रदर्शन करना चाहिए।
भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज 14 जुलाई 2026 से 19 जुलाई 2026 तक इंग्लैंड में खेली जाएगी। इससे पहले टीम पाँच टी20 मैचों की सीरीज में उतरेगी जो 1 जुलाई 2026 से शुरू होगी।
हाँ, विराट कोहली इस वनडे सीरीज में वापसी कर रहे हैं, लेकिन उनकी उपलब्धता 'subject to availability' (उपलब्धता के आधार पर) बताई गई है। रोहित शर्मा की उपस्थिति निश्चित मानी जा रही है।
रोहित शर्मा ने इंग्लैंड में कुल 7 वनडे शतक लगाए हैं, जिनमें से 2 इंग्लैंड के खिलाफ हैं। इंग्लैंड के खिलाफ उनकी 23 मैचों में 846 रन बन चुके हैं। हालाँकि, 2026 के आरंभिक मैचों में उनका प्रदर्शन स्थिर नहीं रहा है।
अभी तक कोई गारंटी नहीं है। सुनील गावस्कर ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि रोहित की उपस्थिति निश्चित नहीं है। इस इंग्लैंड सीरीज को उनके लिए अपनी जगह सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
12 जवाब
रोहित के लिए यह बहुत अच्छा मौका है, उम्मीद है वो जवाब देंगे।
यार रोहित तो हमेशा से ही दबाव में खेलने वाले हैं, उन्हें कुछ नहीं कहना चाहिए! :D
गौसकर का कहना सही है, इंग्लैंड उनके लिए परफेक्ट प्लेटफॉर्म है। देखते हैं कैसे वे अपनी बात साबित करते हैं। चलो सब मिलकर उनका साथ देते हैं! 🏏🔥
मुझे पूरा यकीन है कि वह वर्ल्ड कप 2027 में ओपनिंग करेंगे। उनकी फिटनेस और अनुभव दोनों शानदार हैं। बस थोड़ी धैर्य की जरूरत है। आइए, हम सभी उनके लिए प्रार्थना करें कि वे शानदार प्रदर्शन करें। 😊
अरे वाह, फिर से वही पुरानी बातें शुरू हो गईं! 😒
रोहित अब 39 साल के हैं, क्या आप अभी भी सोचते हैं कि वे युवा खिलाड़ियों को पीछे करके रह सकते हैं? यह तो सिर्फ भावनात्मक जुगाड़ है। गौसकर जैसे दिग्गजों को नई पीढ़ी को अवसर देना चाहिए, न कि पुराने स्टारों को बांधे रखना चाहिए।
इंग्लैंड में पिछले छह मैचों में उनका प्रदर्शन खराब रहा है, फिर भी लोग उन्हें 'परफेक्ट' कह रहे हैं? यह तो देशभक्ति का नाम लेकर तर्क को बेधड़क ढांकने की कोशिश है। अगर वे असली होते, तो पहले ही साबित कर चुके होते। अब तो समय आ गया है कि जaisवाल या पंत को मौका दिया जाए। रोहित का दौर खत्म हो चुका है, इसे स्वीकार करना होगा। 😤
मैं समझ सकता हूं कि क्यों लोग रोहित के प्रति ऐसा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं। उन्होंने टीम के लिए बहुत कुछ किया है। लेकिन क्रिकेट एक खेल है, जहाँ प्रदर्शन सबसे ज्यादा मायने रखता है।
गौसकर का विश्लेषण दिलचस्प है, लेकिन क्या हम यह भूल रहे हैं कि उम्र का प्रभाव पड़ता है? शायद यह समय है कि हम नई पीढ़ी पर भरोसा करें। मुझे लगता है कि हमें संतुलन बनाना चाहिए - अनुभव और ताकत दोनों का। (Y)
log kitne naive hain. rohit ko toh selection committee ne hi apni marzi se rakha hai. gavaskar ki baaton mein kya hai wo sab jante hain. bas media ke liye show hai.
aur haan, virat kohli ka availability depend hona bhi ek bada signal hai. lagta hai team management confuse hai. agar rohit fail hua toh kisiko pata nahi kya hoga. drama badh jayega. main toh dekh raha hu ki kaise ye sab girte hain.
यह अत्यंत निराशाजनक है कि आजकल के मीडिया और विशेषज्ञों द्वारा ऐसे ही अपरिपक्व और भावनात्मक निर्णय लिए जा रहे हैं, जो भारतीय क्रिकेट की दीर्घकालिक रणनीति को कमजोर करते हैं, क्योंकि जब तक हम अपने वरिष्ठ खिलाड़ियों को उनकी क्षमताओं से अधिक महत्व नहीं देंगे, तब तक हम वास्तविक प्रतिभा को पहचानने में विफल रहेंगे, और इससे टीम की गतिशीलता पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा, और इसलिए यह आवश्यक है कि हम एक अधिक वैज्ञानिक और डेटा-आधारित दृष्टिकोण अपनाएं, जो केवल भावनाओं पर निर्भर न हो, बल्कि ठोस साक्ष्यों और आँकड़ों पर आधारित हो, ताकि हम भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रख सकें, जो हमारे राष्ट्रीय गर्व को बनाए रख सके, और इस प्रकार हम एक ऐसी टीम तैयार कर सकें जो हर स्थिति में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सके, और इस तरह हम अपनी विरासत को सुरक्षित रख सकें, जो हमारे पूर्वजों ने कड़ी मेहनत से बनाई थी, और इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए कि हम ऐसे ही गलत निर्णयों से बचें, जो हमारे भविष्य को खतरे में डाल सकते हैं, और इस प्रकार हम एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकें, जो हम सभी के लिए सुखद हो, और इस प्रकार हम एक ऐसी टीम बना सकें जो हमारे देश की शान बने, और इस प्रकार हम एक ऐसी विरासत छोड़ सकें जो हमारे बच्चों के लिए प्रेरणादायक हो, और इस प्रकार हम एक ऐसी दुनिया बना सकें जहाँ खेल केवल मनोरंजन न हो, बल्कि एक जीवनशैली हो, जो हम सभी को एकजुट करे, और इस प्रकार हम एक ऐसी समाज बना सकें जहाँ खेल की भावना सर्वत्र व्याप्त हो, और इस प्रकार हम एक ऐसी राष्ट्र बना सकें जो खेल के माध्यम से विश्व में अपनी पहचान बनाए, और इस प्रकार हम एक ऐसी विरासत छोड़ सकें जो हमारे लिए अभिमान का विषय हो, और इस प्रकार हम एक ऐसी दुनिया बना सकें जहाँ खेल केवल एक खेल न हो, बल्कि एक जीवन दर्शन हो, जो हम सभी को प्रेरित करे, और इस प्रकार हम एक ऐसी समाज बना सकें जहाँ खेल की भावना सर्वत्र व्याप्त हो, और इस प्रकार हम एक ऐसी राष्ट्र बना सकें जो खेल के माध्यम से विश्व में अपनी पहचान बनाए, और इस प्रकार हम एक ऐसी विरासत छोड़ सकें जो हमारे लिए अभिमान का विषय हो।
It is interesting to observe how public sentiment often overrides statistical reality in sports discourse. Rohit Sharma's age is not merely a number; it represents a physiological threshold that cannot be ignored by any rational selector. The notion that he can seamlessly transition into an opening role for the 2027 World Cup, despite inconsistent recent performances, seems to stem from nostalgia rather than objective analysis. One must question whether the selectors are prioritizing legacy over longevity. The data suggests a decline, yet the narrative persists due to emotional attachment. This cognitive dissonance is prevalent in Indian cricket fandom. We need to accept that every era has its twilight. Perhaps it is time to let go of the past and embrace the uncertain but promising future offered by younger talents like Yashasvi Jaiswal. Sentimentality should not dictate national team composition.
क्रिकेट केवल रनों का खेल नहीं है, यह मानसिक लचीलापन का भी खेल है। रोहित ने कई बार दिखाया है कि वह दबाव में कैसे खेल सकते हैं। लेकिन क्या यह पर्याप्त है? शायद हमें यह देखना चाहिए कि क्या वह नई पीढ़ी के साथ सहयोग कर सकते हैं। यह एक गहरा सवाल है।
😂😂😂 लोग अभी भी रोहित को भगवान समझ रहे हैं? यार थोड़ा हकीकत में आओ ना! 🙄
उसने पिछले छह मैचों में औसतन 30-40 रन बनाए हैं, और तुम लोग उसे वर्ल्ड कप का हीरो बना रहे हो? यह तो सिर्फ भ्रम है। गौसकर जैसे दिग्गज भी अब झूठ बोल रहे हैं ताकि अपना चेहरा बचा सकें। असली बात यह है कि रोहित का समय खत्म हो चुका है। उसे रिटायरमेंट ले लेनी चाहिए, न कि लगातार टीम में जगह मांगनी चाहिए। यह टीम को नुकसान पहुँचा रहा है। युवा खिलाड़ी तरस रहे हैं। 🚫📉
अगर वह असली होता, तो वह खुद आगे आए और कहा होता कि अब मेरा काम खत्म हुआ। लेकिन नहीं, वह पुरानी शान में जीना चाहता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। 😞
हमें सभी खिलाड़ियों का सम्मान करना चाहिए, चाहे वे वरिष्ठ हों या युवा। रोहित ने टीम के लिए बहुत कुछ किया है। हमें उनके योगदान को स्वीकार करना चाहिए और साथ ही नई पीढ़ी को भी अवसर देना चाहिए। संवाद और सहयोग ही रास्ता है।
यह तो बिल्कुल गलत दृष्टिकोण है। रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट की रीढ़ हैं, और किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि उनका समय खत्म हो गया है। इंग्लैंड में उनका रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वे उस परिस्थिति में कैसे खेल सकते हैं। गौसकर जैसे दिग्गज जब कहते हैं कि यह एक मंच है, तो इसका मतलब है कि वे विश्वास करते हैं कि रोहित अपनी क्षमता को फिर से साबित कर सकते हैं। युवा खिलाड़ियों को अवश्य ही अवसर मिलना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अनुभवी खिलाड़ियों को अनदेखा किया जाए। भारत को एक संतुलित टीम की आवश्यकता है, जिसमें अनुभव और ऊर्जा दोनों हों। रोहित का अनुभव युवाओं के लिए मार्गदर्शन का काम करता है। यदि हम उन्हें निकाल देंगे, तो टीम में एक खाई पैदा हो सकती है। इसलिए, हमें धैर्य रखना चाहिए और रोहित को यह अवसर देना चाहिए कि वे अपनी बात साबित करें। यदि वे प्रदर्शन करते हैं, तो वे वर्ल्ड कप में ओपनिंग करेंगे, और यदि नहीं, तो तब निर्णय लिया जाएगा। लेकिन अभी से उन्हें बाहर करने की बात करना अजीब है। हमें अपने हीरो का साथ देना चाहिए, न कि उनके खिलाफ जाना चाहिए। भारत की जीत के लिए हमें एकजुट रहना होगा। 🇮🇳🏏
Interesting how suddenly Gavaskar is supportive. I remember him questioning Rohit just months ago. What changed? Did someone pay him off? Or is this just another PR stunt to keep the old guard alive while the BCCI prepares for some bigger agenda? The timing is too convenient. First, Gill becomes captain, then suddenly Rohit gets a 'perfect platform'? It smells fishy. Maybe they want to distract from the real issues in Indian cricket administration. Keep your eyes open, people. Nothing is as it seems.